ब्रैड हॉग और सचिन तेंदुलकर की कहानी – 

Brad Hogg and Sachin Tendulkar story in hindi

इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने 290 रन का स्कोर खड़ा किया था. जवाब में Indian Cricket team बैटिंग करते हुए टारगेट का पीछा कर रही थी। 24 वें ओवर में सचिन तेंदुलकर बैटिंग कर रहे थे और ऑस्ट्रेलिया के ब्रैड हॉग बॉलिंग कर रहे थे। 


इस ओवर की लास्ट बॉल पर सचिन हिट करना चूक गये, बाल सीधे स्टंप पर जा लगी और सचिन बोल्ड हो गये। सचिन के आउट होने से ब्रैड हॉग की ख़ुशी का ठिकाना नहीं, आखिर उसने क्रिकेट के भगवान का विकेट लिया था।  ऑस्ट्रेलिया यह मैच 47 रन से जीत गयी थी। 


इस मैच के अगले दिन दोनों देश की क्रिकेट टीम Net practice कर रही थीं। नेट प्रैक्टिस के दौरान Brad Hogg सचिन के पास एक फोटो पर ऑटोग्राफ लेने आया। जिस फ़ोटो पर ब्रैड हॉग सचिन से औटोग्राफ लेने आया था वो एक दिन पहले Sachin Tendulkar को आउट करने की थी। 


सचिन ने फोटो पर एक लाइन लिखकर उसके नीचे Signature करके ब्रैड हॉग को दे दिया। 


सचिन ने फोटो पर लिखा – This will never happen again, Hoggy (ये अब दुबारा कभी नहीं होगा, हॉगी)


सचिन तेंडुलकर की ये भविष्यवाणी 100% सच हुई और वाकई ऐसा दोबारा कभी नहीं हो पाया। ब्रैड हॉग ने सचिन तेंडुलकर को 1 बार आउट किया बस, दुबारा कभी नहीं। 


– Sachin और Brad Hogg इस सीरीज के बाद 17 बार एक दूसरे के खिलाफ खेले लेकिन ब्रैड सचिन को आउट नहीं कर पाया। इस तरह सचिन ने बिना कोई बहस या व्यंग किये, क्या सही बदला ले लिया। 


– एक बड़ी लाइन को छोटा करने के लिए उसे मिटाने की जरुरत नहीं। आप उससे बड़ी एक लाइन खींच दीजिये, पहली लाइन खुद बखुद छोटी हो जाएगी। 


– महान लोगों की यही खासियत होती है कि वो बहस करके नीचे लेवल पर नहीं उतरते, बल्कि जवाब में वो ऐसा काम कर जाते हैं कि मिसाल बन जाते हैं। 

सचिन तेंदुलकर और ब्रैड हॉग की कहानी

तितली का संसार

एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.

इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था,और पंख सूखे हुए थे.

वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.

वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.

वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे....

तितली का संसार

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